बुध मंत्र

इनके जप का बीज मंत्र ‘ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः’ तथा सामान्य मंत्र ‘बुं बुधाय नमः’ है।

बुध मंत्र का जाप .4 बार किया जाता है।

बुध मंत्र

ॐ उद्बुध्यस्वाग्ने प्रति जागृहि त्वमिष्टापूर्ते सं सृजेधामयं च।
अस्मिन्त्सधस्‍थे अध्‍युत्तरस्मिन् विश्वे देवा यशमानश्च सीदत।।
नवग्रह मंत्र और जप संख्या इस प्रकार से हैं
बुध – ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नमः
जप संख्या – 9.00
जप समय – मध्याह्न काल

बुध स्तुति

जय शशिनन्दन बुध महाराजा। करहु सकल जन कहं शुभ काजा।।
दीजै बुद्धि सुमति बल ज्ञाना। कठिन कष्ट हरि हरि कल्याना।।
हे तारासुत रोहिणि नन्दन। चन्द्र सुवन दुःख दूरि निकन्दन।।
पूजहू आसदास कहं स्वामी। प्रणत पाल प्रभु नमो नमामी।।

प्रियंगुकलिकाश्यामं रूपेणाप्रतिमं बुधम।
सौम्यं सौम्य गुणोपेतं तं बुधं प्रणमाम्यहम।।

ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय् नम: ।

ॐ त्रैलोक्य मोहनाय विद्महे स्मरजन काय धीमहि तन्नो विणु: प्रचोदयात्।

बुध शांति ग्रह मंत्र

प्रियंगुकलिकाश्यामं रूपेणांप्रतिमं बुधम्।
सौम्यं सौम्यगुणोपेतं तं बुधं प्रणमाम्यहम्॥

इस मंत्र का अर्थ है-आपकी काया निशा जैसी है, आप वर्ण में श्याम है। आपके मुखमंडल से तेज चमकता है। आप सभी गुणों में निपुण हैं। हे बुध देव आपको दंडवत प्रणाम-मेरा भी उद्धार करो।

किसी भी एक मंत्र का जाप प्रत्येक ग्रह की निश्चित जपसंख्या के आधार पर करना चाहिए।
यह जाप 108 दाने की रूद्राक्ष माला द्वारा सम्पन्न होता है। प्रतिदिन नियत संख्या में माला करना चाहिए। जप पूर्ण होने पर जप का दशांश हवन, हवन का दशांश तर्पण, तर्पण का दशांश मार्जन एंव मार्जन का दशांश ब्राम्हण भोजन का विधान है।

वैसे तो शास्त्रों में कहा गया है कि ‘‘कलियुग चर्तुभुजों’’ अर्थात् कलियुग में निश्चित जपसंख्या के चार गुना जप करना चाहिए।

नवग्रहों के विभिन्न मंत्र इस प्रकार है:-

नवग्रह बीजमंत्र / जप संख्या और जप समय

कष्ट निवारण और ग्रहपीड़ा शांति हेतु हिन्दू परंपरा में नवग्रहों के बीजमंत्र जप का विधान है. कष्टों और पीड़ा का संबंध जिस ग्रह से हो उसके बीजमंत्र जप बहुत लाभ देते हैं. विधिपूर्वक जप पूर्ण कर लेने पर संबंधित ग्रह की कृपा प्राप्त होती है और कष्टों का निवारण सहज ही हो जाता है।

अगर किसी के ग्रह नक्षत्र में बुध ग्रह के कारण अशांति आती है तो इस मंत्र के नियमित जाप से वह इन चीजों से मुक्ति पा लेता है। साथ ही व्यक्ति के जीवन में शांति आती है।

बुधवार भगवान कृष्ण और गणेश को समर्पित है। साथ ही बुधवार का दिन बुध ग्रह को समर्पित है। इस दिन बुध देव की भी पूजा की जाती है। ऐसा कहा जाता है कि जिनकी राशि में बुध कमजोर होता है, अथवा बुध के कारण अस्थिरता रहती है, उन्हें बुध देव की पूजा-उपासना करनी चाहिए। साथ ही बुध देव को प्रसन्न करने के लिए हर बुधवार को बुध ग्रह शांति मंत्र का जाप करना चाहिए। ऐसा करने से व्यक्ति के जीवन से बुध संबधी बाधाएं दूर हो जाती हैं। आइए, बुध शांति ग्रह मंत्र और इसके लाभ जानते हैं-

बुध से प्रभावित जातक हंसमुख, काव्य, संगीत और खेल में रुचि रखने वाले, शिक्षित, लेखन प्रतिभावान, गणितज्ञ, वाणिज्य में पटु और व्यापारी होते हैं। बधुआ वाचाल और अच्छे वक्ता होते हैं। बुध राशि के जातकों के लिए सेल्समैन और मार्केटिंग में अच्छे अवसर बनते हैं।

बुध मस्तिष्क, जिह्वा, स्नायु तंत्र, कंठ-ग्रंथि, त्वचा, वाक-शक्ति, गर्दन आदि का प्रतिनिधित्व करता है। इसलिए यह स्मरण शक्ति के क्षय, सिर दर्द, त्वचा के रोग, दौरे, चेचक, पित्त, कफ और वायु प्रकृति के रोग, गूंगापन, उन्माद जैसे विभिन्न रोगों का कारक है।

बुध ग्रह की शक्ति के लिए प्रत्येक अमावस्या को व्रत करना चाहिए तथा पन्ना धारण करना चाहिए। ब्राह्मण को हाथी दांत, हरा वस्त्र, मूंगा, पन्ना, स्वर्ण, कपूर, शस्त्र, खट्टे फल तथा घृत दान करने चाहिए।

नवग्रह मंडल में इनकी पूजा ईशान कोण में की जाती है। इनका प्रतीक बाण तथा रंग हरा है। जिन लोगों की कुंडली में बुध अशुभ फल दे रहा है, वे इस दिन साबूत मूंग न खाएं और इसका दान करें। मंगलवार की रात को हरे मूंग भिगोकर रखें और बुधवार की सुबह यह मूंग गाय को खिलाएं।

 

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