आप और आपका घर–घर के लि‍ए वास्‍तु टि‍प्‍स—

मकान बनाते समय उपरोक्त पंच तत्वों के लिए जो प्रकृति जन्य दिशाएँ निर्धारित हैं, उन्हीं के अनुरूप दिशाओं में कक्षों का निर्माण किया जाना चाहिए। नए भवन के निर्माण कराते समय आप अपने शहर के किसी अच्छे वास्तु के जानकार से सलाह अवश्य लें। वास्तु का प्रभाव भवन के रहने वाले व्यक्तियों पर अवश्य पढ़ता है। परंतु इसके साथ-साथ व्यक्ति विशेष के ग्रह योग भी वास्तु के प्रभाव को घटाते-बढ़ाते हैं। हो सकता है कि एक व्यक्ति को कोई विशेष स्थान तकलीफ न दे पर वही स्थान दूसरे व्यक्ति को अत्यंत तकलीफदायक हो। भवन के दरवाजे अपने आप खुलने या अपने आप बंद न होते हों यह भी ध्यान रखना चाहिए। दरवाजों को खोलने या बंद करते समय आवाज होना अशुभ माना गया है। भवन में सीढ़ियाँ वास्तु नियम के अनुरूप बनानी चाहिए, सीढ़ियाँ विषम संख्या (5,7, 9) में होनी चाहिए।

ऐसा हो आपका रसोई इंटीरि‍यर—-
हम सभी को कभी-कभी एक जैसी चीजों से बोरियत होने लगती है और महिलाओं का रसोई में सबसे ज्यादा वक्त गुजरता है। इसीलिए जैसे हम बाकी घर की सुंदरता का ध्यान रखते हैं, रसोई भी हमारे लिए उतनी ही अहम है। वे दिन गए जब मसाले बड़े-बड़े डिब्बों में रखे रहते थे जिसे निकालने में मशक्कत करनी पड़ती थी। आजकल डिब्बे ऐसे हों जो रसोई की ड्रॉयर में तो आ ही जाएं बल्कि जरूरत पड़ने पर डाइनिंग टेबल पर रखने में भी बुरे न लगें। इसीलिए अपनी रसोई की ड्रॉयर में मसाले रखने के खाने विभाजित कर दें और उसमें छोटे-छोटे डिब्बे लगाएँ। अपनी रसोई में हल्के चटक रंगों का प्रयोग अच्छी लाइटिंग के साथ करें। जैसे सफेद, क्रीम, हल्के पीले रंगो के साथ रसोई बड़ी लगेगी। अगर रसोई में खिड़की है तो दिन में उसे जरूर खोलें जिससे रसोई में प्राकृतिक रोशनी आ सके। इससे रसोई बड़ी लगेगी। यह जरूरी नहीं कि अच्छी रसोई के लिए हमेशा बहुत बड़े बजट या प्रोफेशनल की जरूरत पड़ती है। आप चाहें तो छोटे बदलावों से भी रसोई की काया पलट सकती हैं।

घर की डीक्लटरिंग भी है जरूरी—-
घर में सभी को ‘डीक्लटरिंग’ की आदत डालना चाहिए। जैसे पुराने अखबार, प्लास्टिक आदि जो अटाले वाले को बेचने हैं, वो जिम्मेदारी पतिदेव ले सकते हैं। पुराने कपड़े, जो बाइयों को देने हों, वो सासू माँ को सौंपें। आश्रम में दान करने की जिम्मेदारी ससुरजी ले सकते हैं। पुराने खिलौने, चादरें बच्चे, चौकीदार के बच्चों को दे सकते हैं। जिम्मेदारी बाँटने से न सिर्फ आप ‘रिलेक्स्ड’ महसूस करेंगी, बल्कि घर को व्यवस्थित करने में और ‘डीक्लटरिंग’ में सभी स्वयं को भी भागीदार मानेंगे। यदि आपको अनावश्यक सामान खरीदने की आदत है तो उसे बदलें। हमेशा ध्यान रखें कि आपका महत्व आपके सामान से नहीं, बल्कि आपके स्वभाव, आपके कार्यों से है। अनावश्यक भंडारण से जीवन पेचीदा हो जाता है। जिस वक्त किसी चीज को दान करने का विचार आए, उसी समय यह नेक काम कर डालें, क्योंकि वक्त गुजरने के साथ आपका मन भी पलट सकता है। तो, ‘डीक्लटरिंग’ की आदत अपनाएँ और देखें कि आपका जीवन कितना सुलझा हुआ और आसान लगता है।

जब बनाएँ अपना घर…
आधुनिक परिप्रेक्ष्य में पृथ्वी, जल, तेज, वायु, आकाश, पंच तत्व को अपने भवन के अधीन बनाना ही सच्चे अर्थों में वास्तु शास्त्र का रहस्य होता है। नए भवन निर्माण के समय कुछ मुख्य बातों पर ध्यान अवश्य दें : .. जो प्लॉट त्रिकोण आकार का हो, उस पर निर्माण कराना हानिकारक होता है। .. भवन निर्माण कार्य शुरू करने के पहले अपने आदरणीय विद्वान पंडित से शुभ मुहूर्त निकलवा लेना चाहिए। .. भवन निर्माण में शिलान्यास के समय ध्रुव तारे का स्मरण करके नींव रखें। संध्या काल और मध्य रात्रि में नींव न रखें। 4. नए भवन निर्माण में ईंट, पत्थर, मिट्टी ओर लकड़ी नई ही उपयोग करना। एक मकान की निकली सामग्री नए मकान में लगाना हानिकारक होता है। 5. भवन का मुख्य द्वार सिर्फ एक होना चाहिए तो उत्तर मुखी सर्वश्रेष्ठ एवं पूर्व मुखी भी अच्छा होता है। मुख्य द्वार की चौखट चार लकड़ी की एवं दरवाजा दो पल्लों का होना चाहिए।

क्‍योंकि‍ हर रंग कुछ कहता है…
1. बेडरूम – बेडरूम के लि‍ए सबसे अच्‍छा कलर होता है गुलाबी। हालाँकि‍ आप हल्‍का हरा और हल्‍का नीला रंग भी प्रयोग कर सकते हैं। ये रंग आशा और उत्‍कर्ष के प्रतीक होते हैं। 2. लि‍विंग रूम – लि‍विंग रूम को पीले, भूरे या मटमैले रंग से रंगवाना चाहि‍ए। 3. मेडि‍टेशन रूम – यदि‍ आपके घर में ध्‍यान कक्ष है तो उसमें ऐसा रंग करें जो सादगी का एहसास दें जैसे – पीला या लाल या भगवा रंग। ये रंग आपके चि‍त्त की एकाग्रता में मदद करते हैं और आपके मन को शांति‍ भी प्रदान करते हैं। 4. लायब्रेरी – अगर आपने अपने घर में लायब्रेरी रूम बनाया है तो उसका रंग ब्राउन रखें। 5. डायनिंग रूम – डायनिंग रूम ऐसी जगह होती है जहाँ परि‍वार के सभी सदस्‍य एक साथ बैठते हैं और अपनी दि‍न भर के कार्यकलापों पर चर्चा और हँसी मजाक करते हैं। इसलि‍ए इसका रंग हरा, लाल या नीला रखें। सफेद या काले रंग से बचें।

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