श्री हनुमान जयंन्ती, .8 अप्रैल ..11 —-
में —
प्रत्येक मास की पूर्णिमा को चन्द्र देव के लिये जो व्रत किया जाता है, वह पूर्णिमा व्रत कहलाता है. चैत्र मास की पूर्णिमा तिथि के दिन राम भक्त हनुमान जी की जयंती होने के कारण, यह पूर्णिमा अन्य सभी पूर्णिमाओं से अधिक शुभ मानी गई है. 18 अप्रैल 2011 में श्री हनुमान जी का जन्म दिवस मनाया जायेगा. इसके अतिरिक्त जब पूर्णिमा तिथि के दिन चित्रा नक्षत्र हों, तो तरह-तरह की वस्तुओं को दान करने का विधान है. प्रत्येक मास की पूर्णिमा तिथि पवित्र मानी गई है.इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, दान करने से पूरे मास की शुभता बनी रहती है. हिन्दूओं के घरों में भगवान लक्ष्मी नारायण को प्रसन्न करने के लिये इस तिथि में ही व्रत भी रखा जाता है. उदय काल पूर्णिमा में सत्यनारायण देव के लिये भी व्रत किया जाता है. दक्षिण भारतीयों का मत है, कि इस दिन भगवान श्री हनुमान जी का जन्म हुआ था. वायु-पुराण के अनुसार कार्तिक मास की नरक चौदस के दिन हनुमान जी का जन्म हुआ था.
हनुमान जी का जन्म दिवस होने के कारण इस दिन भगवान श्री हनुमान जी का मंत्र का पाठ और मंत्र जाप करना इस दिन विशेष
कल्याणकारी माना गया है.
हनुमान जयंती के दिन श्रद्वालु जन अपने- अपने सामर्थ्य के अनुसार, सिंदुर का चोला, लाल वस्त्र, ध्वजा आदि चढाये. केशर मिला हुआ चंदन, फूलों में कनेर आदि के पीलोए फूल, धूप, अगरबती, गाय के शुद्ध घी का दीपक, आटे को घी में सेंककर गुड मिलाये हुए, लड्डू जिन्हें कसार के लड्डू भी कहा जाता है. उनका भोग लगाये जाते है.
श्री हनुमान व्रत महत्व |
इस व्रत को बच्चों से लेकर बूढों तक सभी नर-नारियों के द्वारा किया जा सकता है. इस व्रत को करने से सभी भक्तों कि मनोकामनाएं पूरी होती है. भगवान श्री हनुमान जी प्रत्यक्ष देव है, और वे सभी के संकट दूर करते है
भगवान हनुमान भक्तों की हर मनोकामना शीघ्र ही पूरी कर देते हैं।
18 अप्रैल, सोमवार को हनुमान जयंती के अवसर पर यदि हनुमानजी की विशेष पूजा, टोटका या उपाय करे तो इसका शीघ्र ही शुभ फल प्राप्त होता है। ऐसा ही एक विशेष कामनापूर्ति उपाय इस प्रकार है-
हनुमान जयंती के दिन या किसी मंगलवार को तेल, बेसन और उड़द के आटे से बनाई हुई हनुमानजी की मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा करके तेल और
घी का दीपक जलाएं तथा विधिवत पूजन कर पूआ, मिठाई आदि का भोग लगाएं। इसके बाद 27 पान के पत्ते तथा सुपारी आदि मुख शुद्धि की चीजें लेकर इनका बीड़ा बनाकर हनुमानजी को अर्पित करें। इसके बाद इस मंत्र का जप करें-
मंत्र- नमो भगवते आंजनेयाय महाबलाय स्वाहा।
फिर आरती, स्तुति करके अपने इच्छा बताएं और प्रार्थना करके इस मूर्ति को विसर्जित कर दें। इसके बाद किसी योग्य ब्राह्मण को भोजन कराकर व दान देकर सम्मान विदा करें।
यह उपाय करने से शीघ्र ही आपकी मनोकामना पूरी होगी।
भौतिक मनोकामनाओं की पुर्ति के लिये बजरंग बाण का अमोघ विलक्षण प्रयोग
अपने इष्ट कार्य की सिद्धि के लिए मंगल अथवा शनिवार का दिन चुन लें। हनुमानजी का एक चित्र या मूर्ति जपकरते समय सामने रख लें।
ऊनी अथवा कुशासन बैठने के लिए प्रयोग करें। अनुष्ठान के लिये शुद्ध स्थान तथाशान्त वातावरण आवश्यक है। घर में यदि यह सुलभ न हो तो कहीं एकान्त स्थान अथवा एकान्त में स्थितहनुमानजी के मन्दिर में प्रयोग करें।
हनुमान जी के अनुष्ठान मे अथवा पूजा आदि में दीपदान का विशेष महत्त्व होता है। पाँच अनाजों (गेहूँ, चावल, मूँग, उड़द और काले तिल) को अनुष्ठान से पूर्व एक-एक मुट्ठी प्रमाण में लेकर शुद्ध गंगाजल में भिगो दें। अनुष्ठान वालेदिन इन अनाजों को पीसकर उनका दीया बनाएँ। बत्ती के लिए अपनी लम्बाई के बराबर कलावे का एक तार लेंअथवा एक कच्चे सूत को लम्बाई के बराबर काटकर लाल रंग में रंग लें। इस धागे को पाँच बार मोड़ लें। इस प्रकारके धागे की बत्ती को सुगन्धित तिल के तेल में डालकर प्रयोग करें। समस्त पूजा काल में यह दिया जलता रहनाचाहिए। हनुमानजी के लिये गूगुल की धूनी की भी व्यवस्था रखें।
जप के प्रारम्भ में यह संकल्प अवश्य लें कि आपका कार्य जब भी होगा, हनुमानजी के निमित्त नियमित कुछ भीकरते रहेंगे। अब शुद्ध उच्चारण से हनुमान जी की छवि पर ध्यान केन्द्रित करके बजरंग बाण का जाप प्रारम्भकरें। “श्रीराम से लेकर सिद्ध करैं हनुमान” तक एक बैठक में ही इसकी एक माला जप करनी है।
गूगुल की सुगन्धि देकर जिस घर में बगरंग बाण का नियमित पाठ होता है, वहाँ दुर्भाग्य, दारिद्रय, भूत-प्रेत काप्रकोप और असाध्य शारीरिक कष्ट आ ही नहीं पाते। समयाभाव में जो व्यक्ति नित्य पाठ करने में असमर्थ हो, उन्हेंकम से कम प्रत्येक मंगलवार को यह जप अवश्य करना चाहिए।
हनुमान उपासना में जरूर हो ऐसी पूजा सामग्री
पंचामृत (गाय का दूध, दही, शहद, शक्कर, घी)
लाल चन्दन
अक्षत
लाल वस्त्र
पंचरंगी कलेवा या मौली
लाल फूल या हार
नारियल
पंच मेवा(जिनमें बादाम, मखाने, काजू, किशमिश, छुहारा शामिल हो)
सुपारी, इलायची और लौंग
डंठलवाला पान
मौसमी पांच फल
सिंदूर, शुद्ध घी और रुई चोले के लिये
केसर
दीपक यथाशक्ति तेल या घी का
कपूर
नेवैद्य (गुड़ से बने लड्डू या रोट)
अगरबत्ती या गुग्गलबत्ती
कम्बल या कुश का आसन
श्री हनुमान की यह उपासना पूजा का स्थान पूर्व दिशा की ओर हो।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here