चोरी हुई वस्तु मिलेगी या नहीं, जानिए ज्योतिष के माध्यम से :- 

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ज्योतिष वाकई एक शास्त्र से बढ़कर विज्ञान है, जिसमें प्रत्येक प्रश्न का उत्तर समाया हुआ है। चोरी गई वस्तु मिलेगी या नहीं मिलेगी। मिलेगी तो कब तक मिलेगी इस बात तक का पता ज्योतिष शास्त्र के जरिए लगाया जा सकता है।

ज्योतिष के अनुसार अलग-अलग नक्षत्रों में चोरी गई वस्तुओं के मिलने या न मिलने का अलग-अलग परिणाम होता है। जिस समय हमें अपनी चोरी गई वस्तु का पता लगे उस समय के नक्षत्र या अंतिम बार आपने फलां वस्तु को किस वक्त देखा था, उस समय के नक्षत्र के अनुसार चोरी गई वस्तु का विचार किया जाता है।

जिस दिन चोरी या सामान गुम हुआ हो उस दिन के नक्षत्र के आधार पर खोई वस्तु के विषय में जानकारी प्राप्त की जा सकती है .खोये सामान की जानकारी मिलेगी अथवा नहीं मिलेगी? इस बात का पता भी नक्षत्रों के अनुसार चल जाता है. 

इन सभी .8 नक्षत्रों को चार बराबर भागों में बाँट दिया गया है. एक भाग में सात नक्षत्र आते हैं. उन्हें अंध, मंद, मध्य तथा सुलोचन नाम दिया गया है. इन नक्षत्रों के अनुसार चोरी की वस्तु का दिशा ज्ञान तथा फल ज्ञान के विषय में जो जानकारी प्राप्त होती है वह एकदम सटीक होती है।
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नक्षत्रों का लोचन ज्ञान :-

अंध लोचन में आने वाले नक्षत्र:- रेवती, रोहिणी, पुष्य, उत्तराफाल्गुनी, विशाखा, पूर्वाषाढा़, धनिष्ठा. 

मंद लोचन में आने वाले नक्षत्र :-अश्विनी, मृगशिरा, आश्लेषा, हस्त, अनुराधा, उत्तराषाढा़, शतभिषा. 

मध्य लोचन में आने वाले नक्षत्र :-भरणी, आर्द्रा, मघा, चित्रा, ज्येष्ठा, अभिजित, पूर्वाभाद्रपद. 

सुलोचन नक्षत्र में आने वाले नक्षत्र :-कृतिका, पुनर्वसु, पूर्वाफाल्गुनी, स्वाति, मूल, श्रवण, उत्तराभाद्रपद. 
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नक्षत्रों के द्वारा जानिए :-
यदि वस्तु अंध लोचन में खोई है तो वह पूर्व दिशा में शीघ्र मिल जाती है. 


यदि वस्तु मंद लोचन में गुम हुई है तो वह दक्षिण दिशा में होती है और गुम होने के .-4 दिन बाद कष्ट से मिलती है. यदि वस्तु मध्य लोचन में खोई है तो वह पश्चिम दिशा की ओर होती है और एक गुम होने के एक माह बाद उस वस्तु की जानकारी मिलती है. ढा़ई माह बाद उस वस्तु के मिलने की संभावना बनती है. यदि वस्तु सुलोचन नक्षत्र में गुम हुई है तो वह उत्तर दिशा की ओर होती है. वस्तु की ना तो खबर ही मिलती है और ना ही वस्तु ही मिलती है. 
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चोरी हुई वस्तु कहां छिपाई गयी?
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-लग्नेश और सप्तमेश का आपस में परिवर्तन या दोनों एक ही भाव में हो तो वस्तु घर में ही कहीं छुपी या छुपाई गयी है।
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-चंद्रमा अगर लग्न में हो तो वस्तु पूर्व दिशा में होगी और अगर सप्तम में हो तो वस्तु पश्चिम में मिलेगी। चंद्रमा अगर दशम ने हो तो दक्षिण और चतुर्थ में हो तो वस्तु उत्तर दिशा में मिलेगी।
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-अगर लग्न में अग्नितत्व राशि ( मेष, सिंह, धनु ) हो तो वस्तु घर के पूर्व, अग्नि -स्थान, रसोई घर में ही मिल जाती है।
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-लग्न में अगर पृथ्वी -तत्व राशि ( वृषभ, कन्या, मकर ) हो तो वस्तु दक्षिण दिशा में भूमि में दबी मिलेगी।
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-अगर लग्न में वायु -तत्व राशि ( मिथुन, तुला, कुम्भ ) हो तो वस्तु पश्चिम दिशा में हवा में लटकाई गयी है।
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-लग्न में जल-तत्व राशि ( कर्क, वृश्चिक, कुम्भ ) हो तो वस्तु जलाशय के पास या उसके आस-पास उत्तर दिशा में मिलेगी।
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प्रश्न कुंडली के द्वारा जाने :-
यदि लग्न को लग्नेश और चंद्र दोनों ही देखते हों तो कार्य पूर्ण रूप से सिद्ध होता है। 
यदि उदित प्रश्न लग्न के भाव ., 4, 5, 7, 9 या 1. में शुभ ग्रह स्थित हो और कोई अशुभ ग्रह नहीं हो तो सफलता निश्चित रूप से मिलती है। 
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         अब प्रश्न लग्न से चोरी देखें
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जब भी चोरी का पता लगता है उस समय को नोट कर लीजिये। अगर किसी को जन्मकुंडली देखने का ज्ञान है तो ठीक है नहीं तो किसी भी ज्योतिष के पास समय को बता कर समस्या का समाधान किया जा सकता है।
चोरी होने की सूचना मिलते ही  तुरंत प्रश्न कुंडली बनायें।
मेष या वृषभ लग्न —-पूर्व दिशा
मिथुन लग्न         —– अग्नि कोण
कर्क लग्न             —- दक्षिण
सिंह लग्न ———— नैरित्य कोण
कन्या लग्न ——— उत्तर दिशा
तुला और वृश्चिक लग्न — पश्चिम दिशा
धनु लग्न ———— वायव्य कोण
मकर और कुम्भ लग्न —उत्तर दिशा
मीन लग्न ————इशान कोण
उपरोक्त लग्नो में खोयी वस्तु ,उसके दिखाए गए लग्नो के सामने की दिशा में गयी है।
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       चोरी किसने की उसकी जाती क्या है
अब सवाल उठता है चोरी करने वाला कौन हो सकता है तो नीचे लिखे लग्नो के आधार पर पता लगाया जा सकता है।
मेष लग्न —ब्राह्मण या सम्मानीय भद्र पुरुष
वृषभ लग्न–क्षत्रिय
मिथुन लग्न —–वेश्य
कर्क लग्न ——-शुद्र या सेवक वर्ग
सिंह लग्न ——स्वजन या आत्मीय व्यक्ति
कन्या लग्न—- कुलीन स्त्री ,घर की बहू  -बेटी  या बहन
तुला लग्न —-पुत्र ,भाई या जमाता
वृश्चिक लग्न– इतर जाति का व्यक्ति
धनु लग्न —स्त्री
मकर लग्न —वेश्य या व्यापारी
कुम्भ लग्न—चूहा
मीन लग्न—-खोयी घर में ही पड़ी है कहीं ( मिस-प्लेस )

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           चोर की उम्र कितनी होना चाहिए
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ग्रहों के हिसाब से चोर कौन है और कितनी उम्र का है ये भी पता लगाने की कोशिश करते हैं।
1) प्रश्न -कुंडली में यदि लग्न पर सूर्य-चन्द्र दोनों की दृष्टि पड़ रही हो तो वस्तु  किसी घर के व्यक्ति ने ही चुराई है।और यदि लग्नेश ,सप्तमेश से युक्त हो कर लग्न में हो तो भी चोरी किसी घर के व्यक्ति ने ही की है।
2)लग्न पर सूर्य या चन्द्र किसी एक ही की दृष्टि पड़ रही हो तो वस्तु किसी आस पास रहने वाले व्यक्ति ने चुराई है।
3)अगर सप्तमेश द्वादश या तृतीय स्थान में हो तो घर के नौकर ने चोरी की है।
4 )अगर सप्तमेश स्वग्रही या अपनी उच्च राशि में हो तो चोरी पेशेवर चोर ने की है। यहाँ पर चोर की शक्ति का ज्ञान लग्न,सप्तम और दशम भाव के बल के अनुसार करना चाहिए।
5) प्रश्न -कुंडली में अगर सूर्य बलवान हो तो पिता या पितातुल्य व्यक्ति ,चंद्रमा बलि हो तो माँ या मातातुल्य  महिला ,शुक्र बली हो तो महिला ,वृहस्पति बलि हो तो घर के मालिक ने ,शनि बलि हो तो पुत्र ने और मंगल बलि हो तो भाई या सगा भतीजा तथा बुध बलवान हो तो मित्र या मित्र -सम्बन्धियों ने चोरी की है।

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       चोर की उम्र कितनी होगी
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लग्न में अगर शुक्र —-युवक
                      बुध —- बालक
                    गुरु —–वृद्ध
                   मंगल–युवक
                  शनि — वृद्ध ….चोर है।
लग्न और दशम भाव के मध्य सूर्य है तो चोर बालक है। दशम भाव और सप्तम भाव के मध्य  सूर्य हो तो चोर युवक है। लग्न और चतुर्थ भाव के मध्य सूर्य हो तो चोर अत्यंत वृद्ध है


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प्रश्न कुंडली से कार्य के पूर्ण होने में लगने वाले समय का विचार 
प्रश्न लग्न और चंद्र के बीच में जितने राशि के अंक आते हैं, उतने दिन कार्य को पूरा करने में लगते हैं। 
प्रश्न लग्न के नवांश लग्न का अंक अर्थात् राशि तथा नवांश लग्नेश की राशि का अंक देखते ही जो अंक, राशि के होंगे, उनके स्वामी होंगे, वे ही दिन-माह बताएंगे। ग्रहों के अनुसार समय निर्धारण सूर्य – अयन ( 6 माह) चंद्र – मिनट मंगल – दिन बुध – एक ऋतु गुरु – माह शुक्र – पक्ष (15 दिन) शनि – वर्ण कार्य की सफलता का प्रतिशत यदि प्रश्न कुंडली के लग्न पर किसी शुभ ग्रह की दृष्टि हो तो कार्य में 25 प्रतिशत सफलता मिलती है। यदि प्रश्न लग्न पर लग्नेश की दृष्टि हो अर्थात् प्रश्न लग्न अपने स्वामी से दृष्ट हो तो 50 प्रतिशत सफलता मिलती है। यदि प्रश्न लग्न अपने स्वामी तथा किसी एक शुभ ग्रह से दृष्ट हो तो 75 प्रतिशत सफलता मिलती है। यदि प्रश्न लग्न अपने स्वामी और किन्हीं दो शुभ ग्रहों से दृष्ट हो तो 85 प्रतिशत सफलता मिलती है। यदि प्रश्न लग्न अपने स्वामी के अतिरिक्त गुरु, शुक्र, बुध तथा चंद्र अर्थात् सभी शुभ ग्रहों से दृष्ट हों तो 100 प्रतिशत सफलता मिलती है। 
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          चोरी करके चीज कहा रखी है
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अब चोरी हुई वस्तु कहाँ छिपाई गयी है इस पर विचार करते हैं।
1) लग्नेश और सप्तमेश  का आपस में परिवर्तन  या दोनों एक ही भाव में हो तो वस्तु घर में ही कहीं छुपी या छुपाई गयी है।
2) चंद्रमा अगर लग्न में हो तो वस्तु  पूर्व दिशा में होगी और अगर सप्तम में हो तो वस्तु पश्चिम में मिलेगी।चंद्रमा अगर दशम ने हो तो दक्षिण और चतुर्थ में हो तो वस्तु  उत्तर दिशा में मिलेगी।
3) अगर लग्न में अग्नितत्व राशि ( मेष ,सिंह ,धनु ) हो तो वस्तु घर के पूर्व,अग्नि -स्थान , रसोई घर में ही मिल जाती है।
4 ) लग्न में अगर पृथ्वी -तत्व राशि ( वृषभ ,कन्या ,मकर ) हो तो वस्तु दक्षिण दिशा में भूमि में दबी मिलेगी।
5 ) अगर लग्न में वायु -तत्व राशि  ( मिथुन ,तुला कुम्भ ) हो तो वस्तु पश्चिम दिशा में हवा में लटकाई गयी है।
6 )लग्न में जल-तत्व राशि ( कर्क ,वृश्चिक ,कुम्भ )  हो तो वस्तु जलाशय के पास या उसके आस-पास उत्तर दिशा में मिलेगी।

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         चोरी हुई चीज मिलेगी या नही
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यह सब जानने  के बाद यह भी प्रश्न उठता है , जो सामान चोरी हुआ है वह मिलेगा या नहीं ? इसके लिए प्रश्न कुंडली में चंद्रमा की स्थिति देखी  जाती है। यहाँ पर चंद्रमा को मालिक और  सातवें  भाव को चोर माना जाता है।चौथे भाव को धन -प्राप्ति  की जगह और लग्न -भाव को चोरी गया सामान माना जाता है।
1) लग्न -भाव का स्वामी अगर सातवें घर या उसके स्वामी के साथ हो तो कोशिश करने पर चोरी गया धन मिल जाता है।
2)अगर लग्न -भाव का स्वामी अष्ठम में हो तो चोर खुद ही चोरी की गयी वस्तु  लौटा देगा।लेकिन ग्रह  अस्त होगा तो चोरी का पता चलेगा पर वस्तु नहीं मिलेगी।
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3)लग्न-भाव का स्वामी दसवें घर के स्वानी के साथ है तो चोर माल सहित पकड़ा जायेगा।
4) अगर लग्नेश की दृष्टि दसवें घर के स्वामी पर नहीं पद रही हो तो चोरी गयी वस्तु नहीं मिलेगी।
5)अगर सातवें घर का स्वामी सूर्य के साथ अस्त हो तो बहुत समय बाद चोर का तो पता चल जायेगा पर वास्तु नहीं मिलेगी।
6)अगर सप्तमेश और लग्नेश साथ में हो तो चोर  राज भय से डर  कर खुद ही माल को दे देता है।
7)अगर  सप्तमेश  पर लग्नेश की दृष्टि ना पड़  रही हो तो ना चोर को लाभ लाभ होता है ना मालिक को ,माल को     मध्यस्थ ही  हड़प लेता है।
8)प्रश्न कुंडली में अष्ठम भाव चोर के धन रखने का स्थान होता है इसलिए अगर धन भाव  का  स्वामी अष्ठम में ही बैठा हो तो माल नहीं मिलेगा।और अगर धन भाव का स्वामी सप्तम में हो तो भी माल नहीं मिलता क्यूँ कि “चंद्रास्वामी चोर सप्तम ”  के अनुसार  सप्तम भाव स्वयं  चोर है।
9) धनेश अगर अष्टमेश के साथ हो तो धन मिल जाता है।
10) अगर अष्टमेश ,दशमेश के साथ हो तो राज-पुरुष चोर का पक्षपाती ही माल नहीं मिलेगा।
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चोरी और गायब सामान का प्रश्न हल करने की विधि ;-
लग्न से प्रश्नकर्ता का, चंद्र से खोए हुए सामान का, चतुर्थ भाव से खोए सामान और उसकी पुनः प्राप्ति का, सप्तम भाव से चोर का, अष्टम भाव से चोर द्वारा जमा धन का तथा दशम भाव से पुलिस या सरकार का विचार किया जाता है। 
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सिद्धि/कार्य नाश: प्रश्न फल कथन की अंकों वाली यह विधि भी ठीक है जिसमें पृच्छक से 1 से 108 तक के अंकों के मध्य की कोई भी संख्या पूछी जाती है और वह जो संख्या बतलाता है उसमें 12 का भागकर बची हुई संख्या अर्थात शेष के आधार पर इस प्रकार फलकथन किया जाता है। 0, 2, 6 या 11 शेष बचे तो कार्य सिद्ध होगा। 4, 5, 8 या 10 शेष बचे तो कार्य सिद्ध नहीं होता। 1, 7 या 9 शेष बचे तो कार्य विलंब से सिद्ध होता

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