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नव ग्रह स्तोत्र—-

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स्तोत्र—–

स्तोत्र के बारे में यही मै कहूँगा कि जो काम किसी से नहीं हो सकता वो स्तोत्र से होगा, स्तुति से होगा|अक्सर मैने लोगो को देखा है वो बड़े बड़े उपाए कर लेते है, हजारो रुपये खर्च देते है, नाना प्रकार की वस्तुए दान करते है, और देवताओं को चडाते है| परन्तु फिर भी उन का काम नहीं बनता मन की इच्छा पूरी नहीं होती, इस का क्या कारण है?
इस का बहुत बड़ा कारण है कि वो स्तुति/स्तोत्र करना नहीं जानते, ऐसा समझो कि आप अपने घर में किसी मेहमान को आमंत्रित करो उस मेहमान को जिस से आप को बहुत जरुरी काम निकलवाना हो और उस के आगे आप नाना प्रकार के व्यंजन रख दो, उस का फूलो से स्वागत भी कर दो, परन्तु एक बार भी उसे आप अपनी बात उस से कह न पाओ उस की प्रशंसा में दो शब्द कह न पाओ तो कोई ढीठ इंसान तो है नहीं, कि आपकी दी हुई वस्तुए स्वीकार कर लेगा और आपका काम कर देगा |
देवता तो बहुत ऊँची श्रेणी है हजारो वर्ष की तपस्या के बाद उन्हें यह पद मिला है वो ऐसे खुश होने वाले नहीं है, उन्हें आप के कर्मो का लेखा-जोखा भी रखना है|हम उन्हें सिर्फ एक विधि से ही प्रसन्न कर सकते है, और अपने गुनाहों को माफ़ करवा सकते हो और वो विधि सिर्फ स्तोत्र है|
नव ग्रह स्तोत्र
ग्रहनामादिरादित्यो लोकरक्षण कारका:!
विषमस्थानसंभूतं!पीड़ा हरतु में रवि:!! १ !!
रोहिनिश: सुधामूर्ति: सुधागात्र: सुधाशाना:!
विषमस्थान सम्भूतं! पीड़ा हरतु में विधु:!! २ !!
भूमिपुत्रो महातेजा जगतं! भयकृत सदा !
वर्षितकृद वर्षित हरता च पीड़ा! हरतु में कुज:!!३ !!
उत्पातरूपों जगता चन्द्रपुत्रो महाधृति:!
सूर्य प्रियकरो विद्वान पीड़ा हरतु में बुध:!!४ !!
देवमन्त्री विशालाक्षा सदा लोकहिते रत:!
अनेक:शिष्यसंपूर्ण: पीड़ा हरतु में गुरु:!!५ !!
देत्यमंत्री गुरु स्तेषा:प्राण दश्चा महामति:!
प्रभु सतारा ग्रेहाना च पीड़ा हरतु में भृगु:!!६ !
सूर्यपुत्रो दीहर्गाहदेहो विशालाक्ष: शिवप्रिय:!
मन्दचारा: प्रस्सन!त्मा पीड़ा! हरतु में शनि: ७!!
महाशिरो महावक्त्रो धिरघद्रश्तो महाबला:!
अतनुशोचधरवकेश्चा पीड़ा हरतु में शिखी:८ !!
अनेकरूपवरनेशच शतशोअथ सहस्तेर्षा:!
उत्पातरूपों जगतं!पीड़ा! हरतु में तम:!!९ !!
इति ब्रह्माण्डपुरानोकत नवग्रेहपीड़ाहरस्तोत्र सम्पूर्णं !!
Nav greh stotar—-
Greh nama dira dityo lok rakshan karka :!
Visham sathan sambhutam piddam hartu mei ravi,
Rohi nisha sudha murti sudha gatra sudhashana ,
Visham sathan sambhutam piddam hartu mei vidhu,
Bhumi putro maha teja jagtam bhay krit sada ,
Vrishat krid vrishiti harta cha piddam hartu mei kuja,
Utpat rupo jagtam chander putro maha dhu riti,
Surya prya karo vidwan piddam hartu mei budha,
Dev mantra vishal aksha sada lok hite rata,
Anek shishya sampurna pidam hartu mei guru
Detya mantri guru steshan pran dash cha ev mahamati,
Prabhu satara greh nama cha piddam hartu mei bhurugu,
Surya putro dhirgh deho vishal aksha shiv priya,
Mand chara: prassan atma piddam hartu mein shani:!!
Maha shiro maha vaktro dhirag drashto maha bala :!
Atnu sho dharav keshcha piddam hartu mei shikhi:!!
Anek roop var nesh cha ev shat sho ath shashet sha:!
Utpat rupo jagtam piddam hartu mei tama:!!
Iti shri brahmand puranokat nav greh piddam har satotaram sampurnam!!

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